Sunday, November 07, 2010

वह बोल रही है।

वह अब बड़ी हो गई है।
मैं उसकी उम्र की बात नहीं कर रहा।

वह देश के चार पाँच बड़े शहर घूम कर आई है।

मानो उसने अभी अभी चलना सीखा और दौड़ रही है।
मानो उसने अभी अभी भाषा सीखी और बोल रही है।

उसकी तस्वीरों के शोर से समझ में आ रहा है
कि उसका विश्वास छू रहा है,
धरती और आसमान एक साथ।

3 comments:

Aparna Manoj Bhatnagar said...

वह देश के चार पाँच बड़े शहर घूम कर आई है।

मानो उसने अभी अभी चलना सीखा और दौड़ रही है।
मानो उसने अभी अभी भाषा सीखी और बोल रही

उसकी तस्वीरों के शोर से समझ में आ रहा है
कि उसका विश्वास छू रहा है,
धरती और आसमान एक साथ।
bahut sundar rachna ...
aasmaan ko chhune ke liye banjaara man chahiye ... bina tole ke daudna.. chalana.. seekhna aur phir anubhavon ki tasveeren ...
ekdam heart-hitting hai farid ji .
congratulations!

अनुपमा पाठक said...

bahte pani ki nirmalta ke kya kehne...
anubhuti ke dharatal par badi hoti sambhavnayen...!!!

मनीषा पांडे said...

बहुत सरल, ब‍हुत सुंदर।