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Sunday, August 14, 2011

अतीत


जब मुझे वह छोड़ के जा रही थी,
उसके लौटने की उम्मीद में उसका मन मेरे पास ही खड़ा रह गया।
पर वह जा चुकी थी पहाड़ी के उस पार,
जहाँ सूरज ढलता है शाम का।

बरसों बाद आज उसने लौटना चाहा,
पर इस बार उसके मन ने ही उसे रोक दिया।


बरसों बाद आज,
बहुत दूर निकल आने के अहसास ने
उसकी हड्डियों में जो सिहरन पैदा की
वह उम्र की झुर्रियाँ छोड़ गईं। 

बहुत दूर निकल आने का अहसास,  
हमेशा लौटने की अदम्य चाहत के वक़्त ही होता है,
जब लौटना उतना ही मुश्किल होता है,
जितना बचपन और जवानी का लौटना।