Thursday, September 17, 2026

ट्रेन की आहट.

 

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मलबे हटा लिए गए.
सुबूत मिटा दिए गए.
मीडिया अंडर कंट्रोल है.
सोशल मीडिया से चुन चुन कर
गिरफ़्तारियां कर दी गई हैं.
स्वच्छता का राष्ट्रीय अभियान
सिविल डिफ़ेंस हाथों में सौंप दिया गया है.
अब हमारा नेता इत्मीनान से कैट वॉक कर सकता है
और पोछा लगाते हुए
विश्विद्यालयों के कुलपति विकास पर
भाषण दे सकते हैं.
तेज़ रौशनी और डीजे के शोर में
दबाई जा सकती है सपनों की आहट.
पर जिनकी आँखों में अंकित है धर्म की ध्वजा
क्या वे रेल की पटरी पर कान लगा कर
ट्रेन की आवाज़ सुनना भूल गए ?

फ़रीद ख़ाँ

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